ETF vs MUTUAL FUNDS: Where should you INVEST in 2026?

ETF vs Mutual
ETF vs Mutual

दोस्तों, इस आर्टिकल में हम समझेंगे कि ETF और Mutual Fund में क्या अंतर होता है, और 2026 में कौन-कौन से ETFs आप consider कर सकते हैं।

सबसे पहले बात करते हैं कि ETF और Mutual Fund में फर्क क्या है। बहुत लोग इसमें confuse होते हैं। Mutual Fund एक तरह का portfolio होता है, जिसमें कई stocks शामिल होते हैं। उदाहरण के लिए, अगर आपने Nifty 50 का Mutual Fund लिया है, तो भारत की टॉप 50 कंपनियों का जो weightage Nifty 50 index में होता है, उसी हिसाब से fund manager उन कंपनियों के shares खरीदता है। अगर Reliance का weight सबसे ज्यादा है, तो वह ज्यादा खरीदेगा, और बाकी कंपनियों को उनके proportion के हिसाब से खरीदेगा।

अगर आप sectoral mutual fund लेते हैं, जैसे pharma, logistics या financial services, तो fund manager decide करता है कि उस sector में कौन-कौन सी कंपनियाँ बेहतर हैं और उनमें कितना investment करना है।

Mutual Fund की एक खास बात यह है कि जब भी आप इसे खरीदते या बेचते हैं, तो यह दिन के अंत (end of the day) पर ही होता है। उस समय NAV (Net Asset Value) calculate होती है और उसी के आधार पर आपका transaction होता है। मान लीजिए आपने सुबह 9 बजे खरीद लिया, तो पैसे उसी समय कट जाएंगे, लेकिन actual units आपको market बंद होने के बाद calculated NAV पर मिलेंगे। बेचने पर भी यही process लागू होता है और पैसे 1–2 दिन में account में आते हैं।

ETF (Exchange Traded Fund)

अब बात करते हैं ETF की। ETF का पूरा नाम है Exchange Traded Fund। इसका मतलब है कि यह भी एक portfolio ही होता है, लेकिन इसे stock की तरह stock exchange पर खरीदा और बेचा जा सकता है। आप market के खुले रहने के दौरान किसी भी समय ETF खरीद या बेच सकते हैं।

यही ETF और Mutual Fund के बीच सबसे बड़ा अंतर है। ETF में transaction तुरंत होता है, जबकि Mutual Fund में दिन के अंत में।

दूसरा अंतर cost का है। ETFs आमतौर पर index को follow करते हैं और passive होते हैं, इसलिए इनमें research और management cost कम होती है। इसी वजह से इनका expense ratio भी Mutual Funds की तुलना में कम होता है।

तीसरा अंतर minimum investment का है। ETF में आप एक unit भी खरीद सकते हैं, जबकि Mutual Fund में आमतौर पर minimum investment 500 रुपये से शुरू होती है।

हालांकि Mutual Fund का एक बड़ा फायदा है, जो हाल ही में काफी लोकप्रिय हुआ है—Loan Against Mutual Fund (LAMF)।
अगर आपके पास Mutual Fund में investment है, तो आप उसे बेचे बिना उसके against loan ले सकते हैं। मान लीजिए आपके पास 1 लाख रुपये के Mutual Funds हैं, तो आपको लगभग 50,000 रुपये तक का loan मिल सकता है। इस पर interest करीब 10–11% के आसपास होता है, जो personal loan से सस्ता होता है।

इसमें documentation आसान होता है, credit score की dependency कम होती है, और आप कभी भी loan repay कर सकते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि loan के दौरान आपके Mutual Funds lock हो जाते हैं और आप उन्हें बेच नहीं सकते।

अब बात करते हैं कुछ ETFs की, जिन्हें आप 2025 में consider कर सकते हैं। यह कोई financial advice नहीं है, केवल जानकारी के लिए है:

1.SBI Nifty 50 ETF

यह ETF Nifty 50 index को track करता है, यानी भारत की टॉप 50 कंपनियों में investment। लंबे समय में यह relatively stable return देता है। पिछले 5 साल में इसने लगभग 15–16% का annual return दिया है और इसका expense ratio बहुत कम है, करीब 0.04%।

2.Nippon India ETF Junior BeES

यह Nifty Next 50 index को track करता है, यानी rank 51 से 100 तक की कंपनियाँ। यह थोड़ा ज्यादा risky है, लेकिन long term में ज्यादा return देने की संभावना भी रहती है। पिछले 5 साल में इसने strong growth दिखाई है।

3.Kotak Nifty PSU Bank ETF

यह ETF PSU banks में invest करता है। पिछले कुछ सालों में इस sector ने अच्छा performance दिया है, लेकिन इसमें volatility भी ज्यादा हो सकती है।

4.Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF

अगर आप US market में invest करना चाहते हैं, तो यह ETF अच्छा option हो सकता है। यह NASDAQ की टॉप 100 कंपनियों में invest करता है, जिनमें बड़ी tech companies शामिल हैं। पिछले 5 साल में इसका return काफी high रहा है, लेकिन future में यह stabilize हो सकता है।

5.Invesco India Gold ETF

Gold diversification के लिए अच्छा option माना जाता है। यह stock market की तुलना में कम volatile होता है और portfolio को balance करने में मदद करता है। पिछले 5 साल में इसने लगभग दोगुना return दिया है।

अंत में एक महत्वपूर्ण बात—किसी भी ETF या Mutual Fund में निवेश करने से पहले सिर्फ 1 साल का return मत देखें। कम से कम 3 से 5 साल का performance जरूर analyze करें। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले funds ही बेहतर माने जाते हैं।

हमेशा अपनी risk profile और financial goals के अनुसार ही निवेश करें और जरूरत पड़े तो financial advisor की सलाह जरूर लें।

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